हमारी गर्दन के सामने वाले हिस्से में तितली के आकार की एक छोटी सी ग्रंथि होती है, जिसे थायराइड ग्लैंड कहते हैं। जब इस ग्रंथि में एक या एक से ज्यादा गांठें (Nodules) बन जाती हैं और गर्दन में सूजन दिखने लगती है, तो इस स्थिति को नोडुलर गॉइटर (Nodular Goitre) कहा जाता है।
अगर एक ही गांठ हो तो इसे Solitary Nodular Goitre और कई गांठें हों तो इसे Multinodular Goitre कहते हैं।

नोडुलर गॉइटर होने के मुख्य कारण
1. आयोडीन की कमी: यह दुनिया में गॉइटर का सबसे बड़ा कारण है। आयोडीन की कमी से थायराइड हार्मोन नहीं बन पाता और ग्लैंड को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे उसमें गांठें बन जाती हैं।
2. आनुवंशिक कारण: अगर परिवार में किसी को थायराइड की समस्या रही है तो आपको इसका खतरा ज्यादा होता है।
3. हैशिमोटो थायरायडाइटिस: यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता थायराइड को ही नुकसान पहुंचाने लगती है।
4. उम्र और लिंग: यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में और 40 साल के बाद ज्यादा देखी जाती है।
5. रेडिएशन एक्सपोजर: गर्दन पर रेडिएशन थेरेपी या ज्यादा रेडिएशन के संपर्क में आने से भी नोड्यूल बन सकते हैं।
नोडुलर गॉइटर के लक्षण
शुरुआत में छोटे नोड्यूल का पता नहीं चलता, लेकिन जब गॉइटर बड़ा हो जाता है तो ये लक्षण दिखते हैं:
- गर्दन के सामने सूजन या उभार दिखना, जो छूने पर महसूस होता है
- गले में कुछ अटका हुआ महसूस होना या गले में दबाव
- खाना निगलने में दिक्कत (Dysphagia)
- सांस लेने में दिक्कत या सांस फूलना, खासकर लेटने पर
- आवाज में बदलाव या आवाज का भारी होना
- अगर गांठें ज्यादा हार्मोन बना रही हैं तो घबराहट, हाथ कांपना, वजन कम होना और दिल की धड़कन तेज होना (Toxic Goitre के लक्षण)
जांच कैसे होती है?
डॉक्टर सबसे पहले गर्दन की जांच करते हैं और उसके बाद ये टेस्ट लिख सकते हैं:
- Thyroid Function Test (T3, T4, TSH): खून की जांच से पता चलता है कि थायराइड हार्मोन सामान्य है या नहीं।
- Ultrasound (USG Neck): इससे गांठों की संख्या, साइज और प्रकार का पता चलता है।
- FNAC Test: एक पतली सुई से गांठ से थोड़ा सा सैंपल लेकर जांचा जाता है कि कहीं कैंसर तो नहीं है। यह सबसे जरूरी जांच है।
- Thyroid Scan: यह पता लगाने के लिए कि गांठें हार्मोन बना रही हैं या नहीं।
नोडुलर गॉइटर का इलाज
नोट: यह जानकारी केवल जागरूकता के लिए है, इलाज हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही लें।
1. सिर्फ निगरानी (Observation):
अगर गांठ छोटी है, कोई लक्षण नहीं है और FNAC में सब सामान्य है, तो डॉक्टर सिर्फ हर 6 महीने में अल्ट्रासाउंड से निगरानी रखने की सलाह देते हैं।
2. दवाओं से इलाज:
अगर हार्मोन कम या ज्यादा है तो उसके लिए दवाएं दी जाती हैं। आयोडीन की कमी को पूरा करने के लिए आयोडीन युक्त नमक खाने की सलाह दी जाती है।
3. रेडियोएक्टिव आयोडीन थेरेपी:
टॉक्सिक मल्टीनोडुलर गॉइटर में जहाँ गांठें ज्यादा हार्मोन बना रही हों, वहां रेडियोएक्टिव आयोडीन दिया जाता है जो गांठों को छोटा कर देता है।
4. सर्जरी (Thyroidectomy):
इन स्थितियों में सर्जरी जरूरी हो जाती है:
- गांठ बहुत बड़ी हो और सांस/निगलने में दिक्कत हो रही हो
- दिखने में गर्दन बहुत ज्यादा सूजी हुई लग रही हो (Cosmetic reason)
- FNAC में कैंसर का शक हो
परहेज और बचाव
- आयोडीन युक्त नमक का ही प्रयोग करें
- पत्ता गोभी, फूल गोभी का बहुत ज्यादा सेवन न करें अगर थायराइड की समस्या है
- धूम्रपान से बचें
- समय-समय पर थायराइड की जांच कराते रहें
निष्कर्ष: ज्यादातर नोडुलर गॉइटर कैंसर नहीं होते और खतरनाक भी नहीं होते, लेकिन गर्दन में किसी भी नई गांठ को हल्के में न लें। समय पर जांच और सही इलाज से इसे पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है।
Dr. Parminder Singh BEMS





